Bhagavad Gita 8.6 — 6

🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 8   |   श्लोक 6
❖ ───── ✦ ───── ❖
यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् |तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः |
❧ ✦ ❧
yaṃ yaṃ vāpi smaranbhāvaṃ tyajatyante kalevaram .taṃ tamevaiti kaunteya sadā tadbhāvabhāvitaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

हे कुंती पुत्र अर्जुन! यह मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भावको स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग करता है, उस-उसको ही प्राप्त होता है; क्योंकि वह सदा उसी भाव से भावित रहा है |

🌸 English Meaning

Arjuna, thinking of whatever entity one leaves the body at the time of death, that and that alone one attains, being ever absorbed in its thought.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 6
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्