Bhagavad Gita 8.5 — 5

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 8   |   श्लोक 5
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अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् |यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः |
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antakāle ca māmeva smaranmuktvā kalevaram .yaḥ prayāti sa madbhāvaṃ yāti nāstyatra saṃśayaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

जो पुरुष अन्तकाल में भी मुझको ही स्मरण करता हुआ शरीर को त्याग कर जाता है, वह मेरे साक्षात् स्वरूप को प्राप्त होता है—इसमें कुछ भी संशय नहीं है |

🌸 English Meaning

Whoever, at the time of death, remembering Me alone, quits his body, he attains My being; there is no doubt about this.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 5
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्