Bhagavad Gita 8.4 — 4

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 8   |   श्लोक 4
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अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम् |अधियज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर |
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adhibhūtaṃ kṣaro bhāvaḥ puruṣaścādhidaivatam .adhiyajño.ahamevātra dehe dehabhṛtāṃ vara

📖 सरल हिंदी अर्थ

उत्पत्ति-विनाश धर्म वाले सब पदार्थ अधिभूत हैं, हिरण्यमय पुरुष अधिदेव है और हे देहधारियों में श्रेष्ठ अर्जुन! इस शरीर में मैं वासुदेव ही अन्तर्मी रूप से अधियज्ञ हूँ |

🌸 English Meaning

All perishable objects are Adhibhuta; the shining Purushais Adhidaiva; and in this body I Myself, dwelling as the inner witness, am Adhiyajña, O Arjuna!

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 4
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्