Bhagavad Gita 6.7 — 7

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 6   |   श्लोक 7
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जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः |शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः |
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jitātmanaḥ praśāntasya paramātmā samāhitaḥ .śītoṣṇasukhaduḥkheṣu tathā mānāpamānayoḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

सरदी-गरमी और सुख-दुःखादि में तथा मान और अपमान में जिसके अन्तःकरण की वृत्तियाँ भलीभाँति शान्त हैं, ऐसे स्वाधीन आत्मावाले पुरुष के ज्ञान में सच्चिदानन्दधन परमात्मा सम्यक् प्रकार से स्थित हैं अर्थात् उसके ज्ञान में परमात्मा के सिवा अन्य कुछ है ही नहीं |

🌸 English Meaning

The Supreme Spirit is rooted in the knowledge of the self-controlled man whose mind is perfectly serene in the midst of pairs of opposites, such as cold and heat, joy and sorrow, and honour and ignominy.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 7
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्