Bhagavad Gita 6.22 — 22

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 6   |   श्लोक 22
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यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः |यस्मिन्स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते |
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yaṃ labdhvā cāparaṃ lābhaṃ manyate nādhikaṃ tataḥ .yasminsthito na duḥkhena guruṇāpi vicālyate

📖 सरल हिंदी अर्थ

परमात्मा की प्राप्तिरूप जिस लाभ को प्राप्त होकर उससे अधिक दूसरा कुछ भी लाभ नहीं मानता और परमात्म प्राप्ति रूप जिस अवस्था में स्थित योगी बड़े भारी दुःख से भी चलायमान नहीं होता; |

🌸 English Meaning

And having obtained which he does not reckon any other gain as greater than that, and established in which he is not shaken even by the heaviest of sorrows.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 22
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्