Bhagavad Gita 4.7 — 7

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 4   |   श्लोक 7
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यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत |अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् |
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yadā yadā hi dharmasya glānirbhavati bhārata .abhyutthānamadharmasya tadātmānaṃ sṛjāmyaham

📖 सरल हिंदी अर्थ

हे भारत ! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्थात् साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूँ |

🌸 English Meaning

Arjuna, whenever righteousness is on the decline, and unrighteousness is in the ascendant, then I body Myself forth.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 7
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्