Bhagavad Gita 4.4 — 4

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 4   |   श्लोक 4
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अर्जुन उवाच |अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः |कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति |
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arjuna uvāca .aparaṃ bhavato janma paraṃ janma vivasvataḥ .kathametadvijānīyāṃ tvamādau proktavāniti

📖 सरल हिंदी अर्थ

अर्जुन ने कहा— आपका जन्म तो अवर्चीन—अभी हाल का है और सूर्य का जन्म बहुत पुराना है अर्थात् कल्प के आदि में हो चुका था; तब मैं इस बात को कैसे समझूँ कि आप ही ने कल्प के आदि में सूर्य से यह योग कहा था|

🌸 English Meaning

Arjuna said: You are of recent origin, while the birth of Vivasvan dates back to remote antiquity. How, then, am I to believe that You taught this Yoga at the beginning of creations?

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 4
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्