Bhagavad Gita 4.35 — 35

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 4   |   श्लोक 35
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यज्ज्ञात्वा न पुनर्मोहमेवं यास्यसि पाण्डव |येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि (var अशेषाणि) |
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yajjñātvā na punarmohamevaṃ yāsyasi pāṇḍava .yena bhūtānyaśeṣāṇi drakṣyasyātmanyatho mayi

📖 सरल हिंदी अर्थ

जिसको जानकर फिर तू इस प्रकार मोह को नहीं प्राप्त होगा तथा हे अर्जुन! जिस ज्ञान के द्वारा तू सम्पूर्ण भूतों को नि:शेष भाव से पहले अपने में और पीछे मुझ सच्चिदानन्दधन परमात्मा में देखेगा|

🌸 English Meaning

Arjuna, when you have reached enlightenment, ignorance will delude you no more. In the light of that Knowledge you will see the entire creation first within your own self, and then in Me.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 35
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्