Bhagavad Gita 2.8 — 8

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 2   |   श्लोक 8
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न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम् |अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धंराज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् |
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na hi prapaśyāmi mamāpanudyād yacchokamucchoṣaṇamindriyāṇām .avāpya bhūmāvasapatnamṛddhaṃ rājyaṃ surāṇāmapi cādhipatyam

📖 सरल हिंदी अर्थ

क्योंकि भूमि में निःस्फुटक, धन-धान्य सम्पत्र राज्य और देवताओं के स्वामीपने को प्राप्त होकर भी मैं उस उपाय को नहीं देखता हूँ, जो मेरी इन्द्रियों के सुखाने वाले शोक को दूर कर सके|

🌸 English Meaning

For I do not see that which can remove the sorrow of my senses, even after gaining the kingdom on this earth, the wealth of the earth, and the lordship of the gods.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 8
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्