Bhagavad Gita 2.55 — 55

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 2   |   श्लोक 55
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श्रीभगवानुवाच |प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान् |आत्मन्येवात्मना तुष्टः स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते |
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śrībhagavānuvāca .prajahāti yadā kāmānsarvānpārtha manogatān .ātmanyevātmanā tuṣṭaḥ sthitaprajñastadocyate

📖 सरल हिंदी अर्थ

श्री भगवान ने कहा—हे अर्जुन! जिस काल में यह पुरुष मन में स्थित सम्पूर्ण कामनाओं को भलीभाँति त्याग देता है और आत्मा से आत्मा में ही सन्तुष्ट रहता है, उस काल में स्थित प्रज्ञ कहा जाता है |

🌸 English Meaning

Shree Bhagavan said: Arjuna, when one thoroughly dismisses all cravings of the mind, and is satisfied in the self throughthe self, then he is called stable of mind.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 55
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्