Bhagavad Gita 2.32 — 32

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 2   |   श्लोक 32
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यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम् |सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् |
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yadṛcchayā copapannaṃ svargadvāramapāvṛtam .sukhinaḥ kṣatriyāḥ pārtha labhante yuddhamīdṛśam

📖 सरल हिंदी अर्थ

हे पार्थ! अपने-आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय लोग ही पाते हैं|

🌸 English Meaning

Arjuna, happy are the Ksatriyas who get such an unsolicited opportunity for war; which opens the door to heaven.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 32
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्