Bhagavad Gita 2.25 — 25

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 2   |   श्लोक 25
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अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते |तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि |
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avyakto.ayamacintyo.ayamavikāryo.ayamucyate .tasmādevaṃ viditvainaṃ nānuśocitumarhasi

📖 सरल हिंदी अर्थ

यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है। इससे हे अर्जुन! इस आत्मा को उपयुक्त प्रकार से जानकर तू शोक करने के योग्य नहीं है अर्थात तुझे शोक करना उचित नहीं है |

🌸 English Meaning

This soul is unmanifest; it is unthinkable; and it is spoken of as immutable. Therefore, knowing this as such, you should not grieve.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 25
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्