Bhagavad Gita 18.77 — 77

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 18   |   श्लोक 77
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तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः |विस्मयो मे महान् राजन्हृष्यामि च पुनः पुनः |
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tacca saṃsmṛtya saṃsmṛtya rūpamatyadbhutaṃ hareḥ .vismayo me mahān rājanhṛṣyāmi ca punaḥ punaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

हे राजन्! श्रीहरि के उस अत्यन्त विलक्षण रूप को पुनः-पुनः स्मरण करके मेरे चित में महान् आश्चर्य होता है और मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ|

🌸 English Meaning

Remembering also, again and again, that most wonderful Form of Shree Krishna, great is my wonder and I rejoice over and over again.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 77
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्