Bhagavad Gita 18.57 — 57

🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 18   |   श्लोक 57
❖ ───── ✦ ───── ❖
चेतसा सर्वकर्माणि मयि संन्यस्य मत्परः |बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव |
❧ ✦ ❧
cetasā sarvakarmāṇi mayi saṃnyasya matparaḥ .buddhiyogamupāśritya maccittaḥ satataṃ bhava

📖 सरल हिंदी अर्थ

सब कर्मों को मन से मुझमें अर्पण करके तथा समबुद्धि रूप योग को अवलम्बन करके मेरे परायण और निरन्तर मुझमें चितवाला हो |

🌸 English Meaning

Mentally resigning all your duties to Me, and taking recourse to Yoga in the form of even-mindedness, be solely devoted to Me and constantly give your mind to Me.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 57
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्