Bhagavad Gita 18.15 — 15

🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 18   |   श्लोक 15
❖ ───── ✦ ───── ❖
शरीरवाङ्मनोभिर्यत्कर्म प्रारभते नरः |न्याय्यं वा विपरीतं वा पञ्चैते तस्य हेतवः |
❧ ✦ ❧
śarīravāṅmanobhiryatkarma prārabhate naraḥ .nyāyyaṃ vā viparītaṃ vā pañcaite tasya hetavaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

मनुष्य मन, वाणी और शरीर से शास्त्रानुकूल अथवा विपरीत जो कुछ भी कर्म करता है—उसके ये पाँचों कारण हैं |

🌸 English Meaning

These five are the contributory causes of whatever actions, right or wrong man performs with the mind, speech and body.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 15
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्