Bhagavad Gita 17.9 — 9

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 17   |   श्लोक 9
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कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः |आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः |
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kaṭvamlalavaṇātyuṣṇatīkṣṇarūkṣavidāhinaḥ .āhārā rājasasyeṣṭā duḥkhaśokāmayapradāḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

कड़वे, खट्टे, लवण युक्त, बहुत गरम, तीखे, रूखे, दाहकारक और दुःख, चिन्ता तथा रोगों को उत्पन्न करने वाले आहार अर्थात् भोजन करने के पदार्थ राजस पुरुष को प्रिय होते हैं |

🌸 English Meaning

Foods which are bitter, acid, salty, overhot, pungent, dry and burning, and which cause suffering, grief and sickness, are dear to the Rajasika type of men.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 17, श्लोक 9
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्