Bhagavad Gita 17.8 — 8

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 17   |   श्लोक 8
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आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः |रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः |
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āyuḥsattvabalārogyasukhaprītivivardhanāḥ .rasyāḥ snigdhāḥ sthirā hṛdyā āhārāḥ sāttvikapriyāḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

आयु, बुद्धि, बल, आरोग्य, सुख और प्रीति को बढ़ाने वाले, रस युक्त, स्निग्ध और स्थिर रहने वाले तथा स्वभाव से ही मन को प्रिय—ऐसे आहार अर्थात् भोजन करने के पदार्थ सात्त्विक पुरुष को प्रिय होते हैं |

🌸 English Meaning

Foods which promote longevity, intelligence, vigour, health, happiness and cheerfulness, and which are sweet, bland, substantial and naturally agreeable, are dear to the Sattvika type of men.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 17, श्लोक 8
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्