Bhagavad Gita 17.14 — 14

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 17   |   श्लोक 14
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देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम् |ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते |
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devadvijaguruprājñapūjanaṃ śaucamārjavam .brahmacaryamahiṃsā ca śārīraṃ tapa ucyate

📖 सरल हिंदी अर्थ

देवता, ब्राह्मण, गुरु और ज्ञानीजनों का पूजन, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा—यह शरीर संबंधी तप कहा जाता है |

🌸 English Meaning

Worship of gods, the Brahmanas, one’s elders and wise men, purity, straightness, continence and harmlessness—this is called bodily penance.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 17, श्लोक 14
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्