Bhagavad Gita 16.10 — 10

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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 16   |   श्लोक 10
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काममाश्रित्य दुष्पूरं दम्भमानमदान्विताः |मोहाद्गृहीत्वासद्ग्राहान्प्रवर्तन्तेऽशुचिव्रताः |
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kāmamāśritya duṣpūraṃ dambhamānamadānvitāḥ .mohādgṛhītvāsadgrāhānpravartante.aśucivratāḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

वे दम्भ, मान और मद से युक्त मनुष्य किसी प्रकार भी पूर्ण न होने वाली कामनाओं का आश्रय लेकर, अज्ञान से मिथ्या सिद्धांतों को ग्रहण करके और भ्रष्ट आचरणों को धारण करके संसार में विचरते हैं |

🌸 English Meaning

Clinging to desires, wicked, arrogant, and haughty, deluded by ignorance, they take refuge in false doctrines and engage in impure conduct in the world.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 16, श्लोक 10
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्