Bhagavad Gita 15.8 — 8

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 15   |   श्लोक 8
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शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः |गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात् |
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śarīraṃ yadavāpnoti yaccāpyutkrāmatīśvaraḥ .gṛhitvaitāni saṃyāti vāyurgandhānivāśayāt

📖 सरल हिंदी अर्थ

वायु गन्ध के स्थान से गन्ध को जैसे ग्रहण करके ले जाता है, वैसे ही देहादि का स्वामी जीवात्मा भी जिस शरीर का त्याग करता है, उससे इन मनसहित इन्द्रियों को ग्रहण करके फिर जिस शरीर को प्राप्त होता है, उसमें जाता है |

🌸 English Meaning

As the wind carries the scent from its source, so the living entity, who is the master of the body, leaves one body and takes hold of the senses with the mind and enters another body.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 15, श्लोक 8
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्