Bhagavad Gita 15.10 — 10

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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 15   |   श्लोक 10
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उत्क्रामन्तं स्थितं वापि भुञ्जानं वा गुणान्वितम् |विमूढा नानुपश्यन्ति पश्यन्ति ज्ञानचक्षुषः |
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utkrāmantaṃ sthitaṃ vāpi bhuñjānaṃ vā guṇānvitam .vimūḍhā nānupaśyanti paśyanti jñānacakṣuṣaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

शरीर को छोड़कर जाते हुए को अथवा शरीर में स्थित हुए को अथवा विषयों को भोगते हुए को इस प्रकार तीनों गुणों से युक्त हुए को भी अज्ञानी जन नहीं जानते, केवल ज्ञान रूप नेत्रों वाले विवेकशील ज्ञानी ही तत्व से जानते हैं |

🌸 English Meaning

The ignorant know not the soul departing from or dwelling in the body, or enjoying the objects of senses i.e., even when it is connected with the three Gunas; only those endowed with the eye of wisdom are able to realize it.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 15, श्लोक 10
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्