Bhagavad Gita 13.2 — 2

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 13   |   श्लोक 2
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श्रीभगवानुवाच |इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते |एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः |
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śrībhagavānuvāca .idaṃ śarīraṃ kaunteya kṣetramityabhidhīyate .etadyo vetti taṃ prāhuḥ kṣetrajña iti tadvidaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

श्रीभगवान ने कहा—हे अर्जुन! यह शरीर ‘क्षेत्र’ इस नाम से कहा जाता है; और इसको जो जानता है, उसको ‘क्षेत्रज्ञ’ इस नाम से उनके तत्व को जानने वाले ज्ञानीजन कहते हैं

🌸 English Meaning

Sri Bhagavan said: This body, Arjuna, is termed as the Field; and him who knows it, the sages discerning the truth about both refer to as the knower of the Field.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 13, श्लोक 2
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्