Bhagavad Gita 10.9 — 9

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 10   |   श्लोक 9
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मच्चित्ता मद्गतप्राणा बोधयन्तः परस्परम् |कथयन्तश्च मां नित्यं तुष्यन्ति च रमन्ति च |
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maccittā madgataprāṇā bodhayantaḥ parasparam .kathayantaśca māṃ nityaṃ tuṣyanti ca ramanti ca

📖 सरल हिंदी अर्थ

निरंतर मुझमें मन लगाने वाले और मुझ में ही प्राणों को अर्पण करने वाले भक्तजन मेरी भक्ति की चर्चा के द्वारा आपस में मेरे प्रभाव को जानते हुए तथा गुण और प्रभाव सहित मेरा कथन करते हुए ही निरंतर सन्तुष्ट होते हैं और मुझ वासुदेव में ही निरंतर रमण करते हैं |

🌸 English Meaning

With their mind fixed on Me, and their lives surrendered to Me, enlightening one another about My greatness and speaking of Me, My devotees ever remain contented and take delight in Me.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 10, श्लोक 9
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्