Bhagavad Gita 10.3 — 3

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 10   |   श्लोक 3
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यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् |असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते |
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yo māmajamanādiṃ ca vetti lokamaheśvaram .asammūḍhaḥ sa martyeṣu sarvapāpaiḥ pramucyate

📖 सरल हिंदी अर्थ

जो मुझको अजन्मा अर्थात् वास्तव में जन्मरहित, अनादि और लोकों का महान् ईश्वर तत्व से जानता है, वह मनुष्यों में ज्ञानी पुरुष सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है |

🌸 English Meaning

He who knows Me in reality as birthless and without beginning, and as the supreme Lord of the Universe, he, undeluded among men, is purged of all sins.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 10, श्लोक 3
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्