Bhagavad Gita 10.18 — 18

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 10   |   श्लोक 18
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विस्तरेणात्मनो योगं विभूतिं च जनार्दन |भूयः कथय तृप्तिर्हि शृण्वतो नास्ति मेऽमृतम् |
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vistareṇātmano yogaṃ vibhūtiṃ ca janārdana .bhūyaḥ kathaya tṛptirhi śṛṇvato nāsti me.amṛtam

📖 सरल हिंदी अर्थ

हे जनार्दन! अपनी योग शक्ति को और विभूति को फिर भी विस्तारपूर्वक कहिये, क्योंकि आपके अमृतमय वचनों को सुनते हुए मेरी तृष्टि नहीं होती अर्थात् सुनने की उत्कण्ठा बनी ही रहती है|

🌸 English Meaning

Krishna, tell me once more in detail Your power of Yoga and Your glory; for I know no satiety in hearing Your nectar-like words.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 10, श्लोक 18
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्