शिव तत्त्व · अष्ट भैरव

अष्ट भैरव Eight Forms of Bhairava

भगवान शिव के भैरव स्वरूप की आठ रूपों में व्यक्त परंपरा को श्रद्धा, ज्ञान और सांस्कृतिक संदर्भ के साथ जानें।

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परिचय

भैरव के आठ स्वरूपों की परंपरा

भैरव, भगवान शिव के रक्षक और उग्र स्वरूप के रूप में अनेक शैव परंपराओं में पूजित हैं।

अष्ट भैरव की एक प्रचलित परंपरा में आठ स्वरूपों को आठ दिशाओं के संरक्षण से जोड़ा जाता है। इस विन्यास में प्रत्येक स्वरूप के साथ एक दिशा और अष्टमातृका समूह की एक मातृका का संबंध बताया गया है।

इन नामों, क्रमों और पारंपरिक संबंधों का विवरण अलग-अलग आगमिक, तांत्रिक तथा क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न हो सकता है। इसलिए नीचे दिया गया परिचय एक documented पारंपरिक विन्यास के रूप में पढ़ें, सभी परंपराओं की एकमात्र सूची के रूप में नहीं।

परंपरा-सूचना नीचे दिशाओं और मातृकाओं का संबंध एक प्रकाशित भारतीय मूर्तिकला एवं धार्मिक-आइकनोग्राफी संदर्भ में वर्णित विन्यास पर आधारित है। इस संदर्भ में भीषण भैरव के साथ काली और संहार भैरव के साथ महालक्ष्मी/चण्डिका दिए गए हैं; कुछ अन्य संदर्भों में चामुण्डा या नरसिंही जैसे विकल्प मिलते हैं। इसे सभी परंपराओं की एकमात्र सूची न मानें।

आठ स्वरूप

अष्ट भैरव दर्शन

प्रत्येक स्वरूप के साथ जोड़ी गई दिशा और मातृका का नाम उसी पारंपरिक विन्यास के संदर्भ में दिया गया है।

  1. पूर्व

    असितांग भैरव

    Asitanga Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में पूर्व दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    पूर्व (East)
    सम्बद्ध मातृका
    ब्रह्माणी
  2. असितांग भैरव का चित्र, श्वान वाहन के साथ
  3. आग्नेय

    रुरु भैरव

    Ruru Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में आग्नेय दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    आग्नेय (South-East)
    सम्बद्ध मातृका
    माहेश्वरी
  4. दक्षिण

    चण्ड भैरव

    Chanda Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में दक्षिण दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    दक्षिण (South)
    सम्बद्ध मातृका
    कौमारी
  5. नैऋत्य

    क्रोध भैरव

    Krodha Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में नैऋत्य दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    नैऋत्य (South-West)
    सम्बद्ध मातृका
    वैष्णवी
  6. पश्चिम

    उन्मत्त भैरव

    Unmatta Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में पश्चिम दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    पश्चिम (West)
    सम्बद्ध मातृका
    वाराही
  7. वायव्य

    कपाल भैरव

    Kapala Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में वायव्य दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    वायव्य (North-West)
    सम्बद्ध मातृका
    इन्द्राणी
  8. उत्तर

    भीषण भैरव

    Bhishana Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में उत्तर दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    उत्तर (North)
    सम्बद्ध मातृका
    काली
  9. ईशान

    संहार भैरव

    Samhara Bhairava

    इस पारंपरिक दिशा-विन्यास में ईशान दिशा के रक्षक स्वरूप से संबद्ध।

    दिशा
    ईशान (North-East)
    सम्बद्ध मातृका
    महालक्ष्मी / चण्डिका

भक्ति चिंतन

श्रद्धा, संयम और सजगता

भैरव उपासना को समझते समय श्रद्धा के साथ परंपरा, आचरण और उसके सांस्कृतिक संदर्भ का सम्मान भी महत्त्वपूर्ण है।

शिव के भैरव स्वरूप का स्मरण हमें साहस के साथ विवेक, शक्ति के साथ उत्तरदायित्व और भक्ति के साथ विनम्रता का भाव रखने की प्रेरणा दे सकता है।