Bhagavad Gita 16.17 — 17

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 16   |   श्लोक 17
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आत्मसम्भाविताः स्तब्धा धनमानमदान्विताः |यजन्ते नामयज्ञैस्ते दम्भेनाविधिपूर्वकम् |
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ātmasambhāvitāḥ stabdhā dhanamānamadānvitāḥ .yajante nāmayajñaiste dambhenāvidhipūrvakam

📖 सरल हिंदी अर्थ

वे अपने-आपको ही श्रेष्ठ मानने वाले घमण्डी पुरुष धन और मान के मद से युक्त होकर केवल नाम मात्र के यज्ञों द्वारा पाखण्ड से शास्त्रविधि रहित यजन करते हैं |

🌸 English Meaning

Intoxicated by wealth and honour, those self-conceited and haughty men worship God through nominal sacrifices for ostentation without following the sacred rituals.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 16, श्लोक 17
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्