Bhagavad Gita 12.9 — 9

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 12   |   श्लोक 9
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अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम् |अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय |
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atha cittaṃ samādhātuṃ na śaknoṣi mayi sthiram .abhyāsayogena tato māmicchāptuṃ dhanañjaya

📖 सरल हिंदी अर्थ

यदि तू मन को मुझमें अचल स्थापना करने के लिये समर्थ नहीं है तो हे अर्जुन ! अभ्यास रूप योग के द्वारा मुझको प्राप्त होने के लिये इच्छा कर |

🌸 English Meaning

If you cannot steadily fix the mind on Me, Arjuna, then seek to attain Me through the Yoga of repeated practice.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 12, श्लोक 9
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्