Bhagavad Gita 9.31 — 31

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 9   |   श्लोक 31
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क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति |कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति |
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kṣipraṃ bhavati dharmātmā śaśvacchāntiṃ nigacchati .kaunteya pratijānīhi na me bhaktaḥ praṇaśyati

📖 सरल हिंदी अर्थ

वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है और सदा रहने वाली परम शान्ति को प्राप्त होता है। हे अर्जुन! तू निश्चयपूर्वक सत्य जान कि मेरा भक्त नष्ट नहीं होता |

🌸 English Meaning

Speedily he becomes virtuous and secures lasting peace. Know it for certain, Arjuna, that My devotee never falls.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 31
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्