Bhagavad Gita 9.7 — 7

🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 9   |   श्लोक 7
❖ ───── ✦ ───── ❖
सर्वभूतानि कौन्तेय प्रकृतिं यान्ति मामिकाम् |कल्पक्षये पुनस्तानि कल्पादौ विसृजाम्यहम् |
❧ ✦ ❧
sarvabhūtāni kaunteya prakṛtiṃ yānti māmikām .kalpakṣaye punastāni kalpādau visṛjāmyaham

📖 सरल हिंदी अर्थ

हे अर्जुन ! कल्पों के अन्त में सब भूत मेरी प्रकृति को प्राप्त होते हैं अर्थात् प्रकृति में लीन होते हैं और कल्पों के आदि में उनको मैं फिर रचता हूँ |

🌸 English Meaning

Arjuna, during the Final Dissolution all beings enter My Prakrti, and at the beginning of creation, I send them forth again.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 7
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्