Bhagavad Gita 9.6 — 6

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 9   |   श्लोक 6
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यथाकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान् |तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय |
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yathākāśasthito nityaṃ vāyuḥ sarvatrago mahān .tathā sarvāṇi bhūtāni matsthānītyupadhāraya

📖 सरल हिंदी अर्थ

जैसे आकाश से उत्पन्न सर्वत्र विचरने वाला महान् वायु सदा आकाश में ही स्थित है, वैसे ही मेरे संकल्प द्वारा उत्पन्न होने से सम्पूर्ण भूत मुझ में स्थित हैं, ऐसा जान |

🌸 English Meaning

Just as the extensive air, which is moving everywhere,ever remains in ether, likewise know that all beingsabide in Me.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 6
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्