Bhagavad Gita 6.47 — 47

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 6   |   श्लोक 47
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योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना |श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः |
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yogināmapi sarveṣāṃ madgatenāntarātmanā .śraddhāvānbhajate yo māṃ sa me yuktatamo mataḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

सम्पूर्ण योगियों में भी जो श्रद्धावान् योगी मुझ में लगे हुए अन्तरात्मा से मुझ को निरन्तर भजता है, वह योगी मुझे परम श्रेष्ठ मान्य है |

🌸 English Meaning

Of all Yogis, again, he who devoutly worship Me with his mind focussed on Me is considered by Me to be the best Yogi.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 47
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्