Bhagavad Gita 6.30 — 30

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 6   |   श्लोक 30
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यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति |तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति |
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yo māṃ paśyati sarvatra sarvaṃ ca mayi paśyati .tasyāhaṃ na praṇaśyāmi sa ca me na praṇaśyati

📖 सरल हिंदी अर्थ

जो पुरुष सम्पूर्ण भूतों में सबके आत्म रूप मुझ वासुदेव को ही व्यापक देखता है और सम्पूर्ण भूतों को मुझ वासुदेव के अन्तर्गत देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता|

🌸 English Meaning

He who sees Mepresent in all beings, and all beings existing within Me, never loses sight of Me, and I never lose sight of him.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 30
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्