Bhagavad Gita 6.5 — 5

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 6   |   श्लोक 5
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उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् |आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः |
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uddharedātmanātmānaṃ nātmānamavasādayet .ātmaiva hyātmano bandhurātmaiva ripurātmanaḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

अपने द्वारा अपना संसार-समुद्र से उद्धार करे और अपने को अधोगति में न डाले, क्योंकि यह मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है |

🌸 English Meaning

One should lift oneself by one’s own efforts and should not degrade oneself; for one’s own self is one’s friend, and one’s own self is one’s enemy.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 5
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्