Bhagavad Gita 4.23 — 23

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 4   |   श्लोक 23
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गतसङ्गस्य मुक्तस्य ज्ञानावस्थितचेतसः |यज्ञायाचरतः कर्म समग्रं प्रविलीयते |
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gatasaṅgasya muktasya jñānāvasthitacetasaḥ .yajñāyācarataḥ karma samagraṃ pravilīyate

📖 सरल हिंदी अर्थ

जिसकी आसक्ति सर्वथा नष्ट हो गयी है, जो देहाभिमान और ममता से रहित हो गया है, जिसका चित निरन्तर परमात्मा के ज्ञान में स्थित रहता है—ऐसे केवल यज्ञ सम्पादन के लिये कर्म करने वाले मनुष्य के सम्पूर्ण कर्म भलीभाँति विलीन हो जाते हैं।

🌸 English Meaning

All his actions melt away, who is free from attachment, whose mind is established in knowledge, and who performs actions for the sake of sacrifice.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 23
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्