Bhagavad Gita 3.20 — 20

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 3   |   श्लोक 20
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कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः |लोकसंग्रहमेवापि सम्पश्यन्कर्तुमर्हसि |
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karmaṇaiva hi saṃsiddhimāsthitā janakādayaḥ .lokasaṃgrahamevāpi sampaśyankartumarhasi

📖 सरल हिंदी अर्थ

जनकादि ज्ञानीजन भी आसक्ति रहित कर्मद्वारा ही परम सिद्धि को प्राप्त हुए थे। इसलिए तथा लोक संग्रह को देखते हुए भी तू कर्म करने को ही योग्य है अर्थात तुझे कर्म करना ही उचित है|

🌸 English Meaning

It is through actionalone that Janaka and otherwise men reached perfection. Having an eye to maintenance of the world order too you should take to action.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 20
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्