Bhagavad Gita 3.11 — 11

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 3   |   श्लोक 11
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देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः |परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ |
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devānbhāvayatānena te devā bhāvayantu vaḥ .parasparaṃ bhāvayantaḥ śreyaḥ paramavāpsyatha

📖 सरल हिंदी अर्थ

तुम लोग इस यज्ञ के द्वारा देवताओं को उन्नत करो और वे देवता तुम लोगों को उन्नत करें। इस प्रकार निःस्वार्थभाव से एक-दूसरे को उन्नत करते हुए तुम लोग परम कल्याण को प्राप्त हो जाओगे|

🌸 English Meaning

Foster the gods through this, and let the gods be gracious to you. Each fostering other disinterestedly, you will attain the highest good.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 11
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्