Bhagavad Gita 3.5 — 5

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 3   |   श्लोक 5
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न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् |कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः |
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na hi kaścitkṣaṇamapi jātu tiṣṭhatyakarmakṛt .kāryate hyavaśaḥ karma sarvaḥ prakṛtijairguṇaiḥ

📖 सरल हिंदी अर्थ

निःसन्देह कोई भी मनुष्य किसी भी काल में क्षण मात्र भी बिना कर्म किये नहीं रहता; क्योंकि सारा मनुष्य समुदाय प्रकृति जनित गुणों द्वारा परवश हुआ कर्म करने के लिये बाध्य किया जाता है |

🌸 English Meaning

Surely none can ever remain inactive even for a moment; for everyone helplessly driven to action by nature-born qualities.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 5
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्