Bhagavad Gita 2.30 — 30

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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM

भगवद्गीता

A Timeless Guide to Life
अध्याय 2   |   श्लोक 30
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देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत |तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि |
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dehī nityamavadhyo.ayaṃ dehe sarvasya bhārata .tasmātsarvāṇi bhūtāni na tvaṃ śocitumarhasi

📖 सरल हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! यह आत्मा सब के शरीरों में सदा ही अवध्य है। इस कारण सम्पूर्ण प्राणियों के लिये तू शोक करने को योग्य नहीं है |

🌸 English Meaning

Arjuna, this soul dwelling in the bodies of all can never be slain; therefore, you should not mourn for anyone.

🪔 Life Lesson

इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।

Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 30
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्