Bhagavad Gita 9.33 — 33
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 9 | श्लोक 33
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किं पुनर्ब्राह्मणाः पुण्या भक्ता राजर्षयस्तथा |अनित्यमसुखं लोकमिमं प्राप्य भजस्व माम् |
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kiṃ punarbrāhmaṇāḥ puṇyā bhaktā rājarṣayastathā .anityamasukhaṃ lokamimaṃ prāpya bhajasva mām
📖 सरल हिंदी अर्थ
फिर इसमें तो कहना ही क्या है, जो पुण्यशील ब्राह्मण तथा राजर्षि भक्तजन मेरी शरण होकर परम गति को प्राप्त होते हैं। इसलिए तू सुखरहित और क्षणभंगुर इस मनुष्य शरीर को प्राप्त होकर निरन्तर मेरा ही भजन कर |
🌸 English Meaning
How much more, then, holy Brahmanas and royal sages devoted to Me! Therefore, having obtained this joyless and transient human life, constantly worship Me.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 33
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
