Bhagavad Gita 9.24 — 24
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 9 | श्लोक 24
❖ ───── ✦ ───── ❖
अहं हि सर्वयज्ञानां भोक्ता च प्रभुरेव च |न तु मामभिजानन्ति तत्त्वेनातश्च्यवन्ति ते |
❧ ✦ ❧
ahaṃ hi sarvayajñānāṃ bhoktā ca prabhureva ca .na tu māmabhijānanti tattvenātaścyavanti te
📖 सरल हिंदी अर्थ
क्यों सम्पूर्ण यज्ञों का भोक्ता और स्वामी भी मैं ही हूँ; परंतु वे मुझ परमेेश्वर को तत्त्व से नहीं जानते, इसी से गिरते हैं अर्थात् पुनर्जन्म को प्राप्त करते हैं |
🌸 English Meaning
For I am the enjoyer and also the lord of all sacrifices; but they know Me not in reality, hence they fall.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 24
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
