Bhagavad Gita 9.18 — 18
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 9 | श्लोक 18
❖ ───── ✦ ───── ❖
गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत् |प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम् |
❧ ✦ ❧
gatirbhartā prabhuḥ sākṣī nivāsaḥ śaraṇaṃ suhṛt .prabhavaḥ pralayaḥ sthānaṃ nidhānaṃ bījamavyayam
📖 सरल हिंदी अर्थ
प्राप्त होने योग्य परम धाम, भरण-पोषण करने वाला, सबका स्वामी, शुभ-अशुभ का देखने वाला, सबका वासस्थान, शरण लेने योग्य, प्रत्यूपकार न चाहकर हित करने वाला, सबकी उत्पत्ति-प्रलय का हेतु, स्थिति का आधार, निधन और अविनाशी कारण भी मैं ही हूँ |
🌸 English Meaning
I am the supreme goal, supporter, lord, witness, abode, refuge, wellwisher seeking no return, origin and end, resting-place, storehouse, and imperishable seed.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 18
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
