Bhagavad Gita 9.15 — 15
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 9 | श्लोक 15
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ज्ञानयज्ञेन चाप्यन्ये यजन्तो मामुपासते |एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम् |
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jñānayajñena cāpyanye yajanto māmupāsate .ekatvena pṛthaktvena bahudhā viśvatomukham
📖 सरल हिंदी अर्थ
दूसरे ज्ञानयोगी मुझ निर्गुण-निराकार ब्रह्म का ज्ञान यज्ञ के द्वारा अभिन्न भाव से पूजन करते हुए भी मेरी उपासना करते हैं, और दूसरे मनुष्य बहुत प्रकार से स्थित मुझ विराट स्वरूप परमेश्वर की पृथक् भाव से उपासना करते हैं|
🌸 English Meaning
Otherbetake themselves to Me through their offering of Knowledge, worshipping Mewith undivided devotion, and others worship Me in many different ways as the Viratform of the Supreme Lord.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 15
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
