Bhagavad Gita 9.12 — 12
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 9 | श्लोक 12
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मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः |राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः |
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moghāśā moghakarmāṇo moghajñānā vicetasaḥ .rākṣasīmāsurīṃ caiva prakṛtiṃ mohinīṃ śritāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
वे व्यर्थ आशा, व्यर्थ कर्म और व्यर्थ ज्ञान वाले विक्षिप्त चित् अज्ञानीजन राक्षसी, आसुरी और मोहिनी प्रकृति को ही धारण किये रहते हैं |
🌸 English Meaning
Those who have deluded minds, engaged in fruitless hopes, fruitless actions, and fruitless knowledge, are attached to the demonic, demoniac, and deluding modes of nature.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 9, श्लोक 12
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
