Bhagavad Gita 8.8 — 8
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 8 | श्लोक 8
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अभ्यासयोगयुक्तेन चेतसा नान्यगामिना |परमं पुरुषं दिव्यं याति पार्थानुचिन्तयन् |
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orsaṃśayama abhyāsayogayuktena cetasā nānyagāminā .paramaṃ puruṣaṃ divyaṃ yāti pārthānucintayan
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे पार्थ ! यह नियम है कि परमेश्वर के ध्यान के अभ्यास रूप योग से युक्त, दूसरी और न जाने वाले चित से निरन्तर चिन्तन करता हुआ मनुष्य परम प्रकाश स्वरूप दिव्य पुरुष को अर्थात् परमेश्वर को ही प्राप्त होता है |
🌸 English Meaning
Arjuna, he who with his mind disciplined through Yoga in the form of practice of meditation and thinking of nothing else, is constantly engaged in contemplation of God attains the supremely effulgent divine Purusha.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 8
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
