Bhagavad Gita 8.14 — 14
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 8 | श्लोक 14
❖ ───── ✦ ───── ❖
अनन्यचेताः सततं यो मां स्मरति नित्यशः |तस्याहं सुलभः पार्थ नित्ययुक्तस्य योगिनः |
❧ ✦ ❧
ananyacetāḥ satataṃ yo māṃ smarati nityaśaḥ .tasyāhaṃ sulabhaḥ pārtha nityayuktasya yoginaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे अर्जुन ! जो पुरुष मुझ में अनन्यचित होकर सदा ही निरंतर मुझ पुरुषोत्तम को स्मरण करता है, उस नित्य-निरंतर मुझमें युक्त हुए योगी के लिये मैं सुलभ हूँ, अर्थात उसे सहज ही प्राप्त हो जाता हूँ |
🌸 English Meaning
Arjuna, whosoever always and constantly thinks of Me with undivided mind, to that Yogi ever absorbed in Me I am easily attainable.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 8, श्लोक 14
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
