Bhagavad Gita 6.40 — 40
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 40
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श्रीभगवानुवाच |पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते |न हि कल्याणकृत्कश्चिद् दुर्गतिं तात गच्छति |
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śrībhagavānuvāca .pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate .na hi kalyāṇakṛtkaścid durgatiṃ tāta gacchati
📖 सरल हिंदी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा—हे पार्थ! उस पुरुष का न तो इस लोक में नाश होता है और न परलोक में ही। क्योंकि हे प्यारे! आत्मोद्धार के लिये अर्थात् भगवानप्राप्ति के लिये कर्म करने वाला कोई भी मनुष्य दुर्गति को प्राप्त नहीं होता|
🌸 English Meaning
Shree Bhagavan said: Dear Arjuna, there is no fall for him either here or herafter. For none who strives for self-redemptionever meets with evil destiny.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 40
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
