Bhagavad Gita 6.37 — 37
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 37
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अर्जुन उवाच |अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानसः |अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति |
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arjuna uvāca .ayatiḥ śraddhayopeto yogāccalitamānasaḥ .aprāpya yogasaṃsiddhiṃ kāṃ gatiṃ kṛṣṇa gacchati
📖 सरल हिंदी अर्थ
अर्जुन ने कहा—हे श्रीकृष्ण! जो योग में श्रद्धा रखने वाला है, किंतु संयमी नहीं है, इस कारण जिसका मन अन्तकाल में योग से विचलित हो गया है, ऐसा साधक योग की सिद्धि को अर्थात् भगवद्साक्षात्कार को न प्राप्त होकर किस गति को प्राप्त होता है? |
🌸 English Meaning
Arjuna said: Krishna, what becomes of the soul who, though endowed with faith, has not been able to subdue his passions, and whose mind is therefore diverted from Yoga, and who thus fails to reach perfection in Yoga?
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 37
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
