Bhagavad Gita 6.3 — 3
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 3
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आरुरुक्षोर्मुनेर्योगं कर्म कारणमुच्यते |योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते |
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ārurukṣormuneryogaṃ karma kāraṇamucyate .yogārūḍhasya tasyaiva śamaḥ kāraṇamucyate
📖 सरल हिंदी अर्थ
योग में आसक्त होने की इच्छा वाले मननशील पुरुष के लिये योग की प्राप्ति में निःकाम भाव से कर्म करना ही हेतु कहा जाता है और योगासक्त हो जाने पर उस योगासक्त पुरुष का जो सर्वसंकल्पों का अभाव है वही कल्याण में हेतु कहा जाता है|
🌸 English Meaning
To the contemplative soul who desires to ascend to Yoga, action is said to be the cause; to him who is attached to Yoga, peace is said to be the cause.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 3
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
