Bhagavad Gita 6.29 — 29
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 29
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सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि |ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः |
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sarvabhūtasthamātmānaṃ sarvabhūtāni cātmani .īkṣate yogayuktātmā sarvatra samadarśanaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
सर्वव्यापी अनंत चेतना में एक भाव से स्थित योग से युक्त आत्मा वाला तथा सबमें समभाव से देखने वाला योगी आत्मा को सम्पूर्ण भूतों में स्थित और सम्पूर्ण भूतों को आत्मा में कल्पित देखता है।
🌸 English Meaning
The Yogi who is united in identity with the all-pervading, infinite Consciousness; and sees unity everywhere, beholds the Self present in all beings, and all beings as assumed in the Self.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 29
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
